Friday, September 10, 2010

श्लोकः

 
|| दुर्जनः परिहर्तव्यः विद्यया-अलन्कृतोपि सन्॥
            मणिना भूषितः सर्पः किमसौ न भयङ्करः ॥

पढ़ा-लिखा,विद्या से युक्त होने पर भी दुष्ट आदमी को दूर रखना चाहिए | क्या  मणि-धारी सर्प कभी जानलेवा नहीं हो सकता है ?   

Friday, August 20, 2010

sundar kavita

देव! तुम्हारे कई उपासक कई ढंग से आते हैं
सेवा में बहुमूल्य भेंट वे कई रंग की लाते हैं

धूमधाम से साज-बाज से वे मंदिर में आते हैं
मुक्तामणि बहुमुल्य वस्तुऐं लाकर तुम्हें चढ़ाते हैं

मैं ही हूँ गरीबिनी ऐसी जो कुछ साथ नहीं लायी
फिर भी साहस कर मंदिर में पूजा करने चली आयी

धूप-दीप-नैवेद्य नहीं है झांकी का श्रृंगार नहीं
हाय! गले में पहनाने को फूलों का भी हार नहीं

कैसे करूँ कीर्तन, मेरे स्वर में है माधुर्य नहीं
मन का भाव प्रकट करने को वाणी में चातुर्य नहीं

नहीं दान है, नहीं दक्षिणा खाली हाथ चली आयी
पूजा की विधि नहीं जानती, फिर भी नाथ चली आयी

पूजा और पुजापा प्रभुवर इसी पुजारिन को समझो
दान-दक्षिणा और निछावर इसी भिखारिन को समझो

मैं उनमत्त प्रेम की प्यासी हृदय दिखाने आयी हूँ
जो कुछ है, वह यही पास है, इसे चढ़ाने आयी हूँ

चरणों पर अर्पित है, इसको चाहो तो स्वीकार करो
यह तो वस्तु तुम्हारी ही है ठुकरा दो या प्यार करो
shubhadra kumari singh chuhan

Wednesday, December 16, 2009

Tuesday, October 06, 2009

विद्वान्‌ सर्वत्र पूज्यते
विद्वत्त्वं च नृपत्वं च नैव तुल्यं कदाचन।स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान्‌ सर्वत्र पूज्यते॥

vidvattvaṁ ca nṛpatvaṁ ca naiva tulye kadācanasvadeśe pūjyate rājā vidvān sarvatra pūjyate

"Being a scholar and being a king are never comparable।A king is worshipped in his own country whereas a scholar is respected everywhere।"

विद्या दानं सदा श्रेष्ठम
अन्नदानं परं दानं विद्या दानम् अतः परम्।अन्नेन क्षणिका तृप्तिः यावज्जीवञ्च विद्यया॥
annadānaṁ paraṁ dānaṁ vidyā dānam ataḥ paramannena kṣaṇikā tṛptiḥ yāvajjīvañca vidyayā
"The offering of food is great; the offering of education is even greater।While food satisfies only momentarily, education satisfies during the entire course of life।"

अतः हम शिक्षकों को विद्या दान अवश्य करना चाहिए

Tuesday, September 29, 2009

प्रिय सज्जनाः
प्रथमं अहम् सर्वेभ्यः नवरात्र दशहरा -उत्सवस्य च शुभाकामनाम प्रयच्छामि
माँ दुर्गा आपका हमेशा कल्याण करें


यह पर्व जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों को पराजित करके विजय प्राप्त करने के लिए और उस विजय को स्थिर करने के लिए महत्त्वपूर्ण है अतः हमें आदि शक्ति से शक्ति हेतु अवश्य प्रार्थना करनी चाहिए
शुभमस्तु

Monday, September 14, 2009

मेरे प्रिय बंधुओं मैं आपके स्नेह का अत्यन्त आभारी हूँ और मुझे विश्वाश है मुझे आपके द्वारा यह स्नेह और उत्साह वर्धन हमेशा मिलता रहेगा इसी आशा के साथ ----------
आपका भूपेंद्र पांडेय